
IIT Khargpur के नैनोटेक्नोलॉजी विभाग में सहायक प्राध्यापक बने छपरा के डॉ शिवेंदु
बिहार ब्रेकिंग

मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। सारण के सुदूर ग्रामीण इलाके की एक प्रतिभा ने अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी शाश्वत प्रतिभा से न सिर्फ जिला, राज्य बल्कि राष्ट्र को भी गौरवान्ति किया है। बात कर रहे हैं अमनौर के सलखुआँ निवासी डॉ. शिवेंदु रंजन की। छोटी सी उम्र में 27 किताबें और अन्तर्राष्ट्रीय जर्नल्स में 45 शोध पत्र प्रकाशित करा चुके डॉ रंजन को आईआईटी खड़गपुर के नैनोटेक्नोलॉजी विभाग में सहायक प्राध्यापक नियुक्त किया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता और छपरा विधि मंडल के पूर्व चर्चित महासचिव रवि रंजन प्रसाद सिंह और शिक्षिका माधुरी सिंह की दूसरी संतान शिवेन्दू की स्कूलिंग छपरा सेंट्रल स्कूल, छपरा से हुई है और इन्होंने बायोटेक्नोलॉजी में बीटेक वीआईटी विश्वविद्यालय, वेल्लोर GATE की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात वीआईटी विश्वविद्यालय से नैनोटेक्नोलॉजी विषय में पीएचडी किया। पीएचडी में शोध का विषय नैनो मेडिसिन था।
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पीएचडी के बाद, आईआईटी कानपुर के स्टार्ट-अप में अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास के विभागाध्यक्ष रहे जहां से इन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय पेटेंट और 4 प्रोडक्ट मार्केट में दिया। इसके बाद जोहान्सबर्ग विश्वविद्यालय से ३ वर्षों के शोध के बाद गुजरात सरकार में सेवा दे रहे हैं। पिता रवि रंजन सिंह, अधिवक्ता एवं शिक्षिका माधुरी सिंह के पुत्र अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता पिता, बड़े भाई शरदेंदु, एवं छोटे भाई आलोक को देते हैं। शिवेन्दू की इस उपलब्धि सारणवासियों में हर्ष की लहर है उन्हें बाधाईयाँ देने वालों का घर पर तांता लगा हुआ है।